Wednesday, August 30, 2023

सत्संग, सुमिरन और श्रेष्ठ गुरू की शरणागति ही इन समस्याओं का पूर्ण समाधान है: सद्गुरूनाथ जी महाराज

प्रचार-प्रसार से दूर रहकर एक निष्काम कर्मयोगी की तरह सद्गुरूनाथ जी महाराज जिस तरह से हिंदू संस्कृति एवं शिव महापुराण कथा को घर-घर तक पहुंचाने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। सद्गुरूनाथ जी महाराज जनमानस के लिए एक आदर्श हैं मार्गदर्शक हैं। विलक्षण प्रतिभा के धनी है गुरूदेव।

सद्गुरूनाथ जी महाराज कहते हैं कि जीव की चेतना पूर्ण परमेश्वर के साथ सम्बन्ध रखे बिना पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकती।  ईश्वर की यही विशेषता है कि वह मार्ग भी बताता है, मार्ग का निर्वाह भी करता है और उसका फल भी देता है। जब मार्ग बताता है तब ईश्वर होता है ज्ञान स्वरूप। जब निर्वाह करता है तब ईश्वर होता है सत-स्वरूप और जब फल देता है तब ईश्वर होता है आनन्द-स्वरूप। इस प्रकार सच्चिदानन्द स्वरूप है और प्रेरक, फलदाता तथा निर्वाह के समय स्थित-स्थापक आत्म-धारणानुकूल व्यापार उत्पन्न करने वाला प्रभु है। 

   अच्छा देखो, साँस लेते हैं तो वही हृदय को स्पन्दन देता है, जिससे हम साँस को खींच सकें या ले सकें, और वही श्वास के रूप में आता-जाता है। वहीं हमें जीवन देता है। जिस प्रकार साँस-के लिए-जो एक शरीर की वस्तु है- पूर्ण वायु की आवश्यकता हो रही है, उसी प्रकार हमारे शरीर में जो चेतना है, वह व्यक्तिगत होते हुए भी उसे सच्चिदानन्द-स्वरूप पूर्ण चेतना से भी सत्ता मिलती है, ज्ञान मिलता है और आनन्द मिलता है। 

इसका अर्थ यह हुआ कि जैसे हम बाहर की वायु के बिना, समष्टि वायु के बिना, जीवित नहीं रह सकते; साँस नहीं ले सकते वैसे ही हमारी अथवा किसी भी जीव की चेतना पूर्ण परमेश्वर के साथ सम्बन्ध रखे बिना पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए आप अपने जीवन-कर्म के प्रेरक रूप में, निर्वाह रूप में और फलदाता-रूप में परमेश्वर को पहचान लीजिये। न अपने आप बुद्धि भगवान में लगती है औन न किसी के द्वारा प्रेरित किए जाने पर लगती है। तब तक भक्ति जागृत नहीं होती जब तक किसी महान संत या गुरू की कृपा उस भक्त पर न हो। 


तन का रोग मिटाना कदाचित संभव भी है पर मन का रोग मिटाना असम्भव तो नहीं कठिन जरूर है। तन का रोगी रोग को स्वीकार कर लेता है लेकिन मन का रोगी कभी भी रोग को स्वीकार नहीं कर पाता।

दूसरों की उन्नति से जलन, दूसरों की खुशियों से कष्ट, दूसरों के प्रयासों से चिन्ता एवं अपनी उपलब्धियों का अहंकार यह सब मानसिक अस्वस्थता के लक्षण ही तो हैं। सत्संग, सुमिरन और भगवद शरणागति ही इस बीमारी का पूर्ण समाधान है।

 

Tuesday, August 29, 2023

श्रावणी शिवमहापुराण कथा का काफी सफल आयोजन रहा जयपुर में, अनेक शिवभक्तों ने सुनाए अपने अनुभव

जयपुर। परम शिव भक्त सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा श्रावणी शिव महापुराण गाथा का अमृतवर्षा से समस्त क्षेत्र शिवमय रहा। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के लोग ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न प्रांतों से काफी संख्या में लोग कथा श्रवण के लिए पहुंचे थे। रिकार्ड संख्या में टेलीविजय एवं सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों ने शिव कथा का आनंद उठाया। सद्गुरूनाथ जी महाराज की दिव्यवाणी से समूचा कथा स्थल भक्ति की ऐसी अविरल धारा में बही की कब शिव महापुराण कथा का समापन हुआ लोगों को पता ही नहीं चला। कथा स्थल में भगवान शिव की अद्भुत अनुभूति लोगों को हुई। लोगों ने कहा कि कोई दिव्य शक्ति जरूर सद्गुरूनाथ जी महाराज के पास है जब वे कथा सुनाने लगते हैं तो लगता है कि भगवान भोलेनाथ साक्षात वहां मौजूद हों। 

सदगुरूनाथ जी महाराज की कथा में देश के गणमान्य व्यक्ति भी पहुंचे। सद्गुरूनाथ जी महाराज ने सभी को धन्यवाद दिया और अपने कर्मक्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आयोजकों ने इतनी सुंदर व्यवस्था कर रखी थी कि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा सद्गुरूनाथ जी महाराज ने की। 


कथा में आए हुए लोगों ने कहा कि सद्गुरूनाथ जी की चर्चा आज हर जगह होती है जिस प्रकार ये आध्यात्मिक, सांसारिक एवं धार्मिक बातों को इतनी सरलता से बताते हैं कि मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। सौम्य, सरल, मृदुभाषी सद्गुरूनाथ जी महाराज की अलौलिक छवि एक अलग ही दिखाई देती है। कथा के दौरान इन्होंने इतनी ज्ञान की बातें बताई उसको जरूरत है अपनी जिंदगी में उतारने की। 

शिवमहापुराण में आए हुए मोहन यादव ने कहा कि मैं और मेरा परिवार 5 सालों से सद्गुरूनाथ जी महाराज के संपर्क में हैं जब कभी भी हमारे जीवन मंें परेशानी आई सदा गुरूदेव ने सही मार्गदर्शन किया है। इनके बताए रास्ते पर चलकर आज मेरा परिवार खुशहाली का जीवन जी रहा है। 

अनेक ऐसे चमत्कार सद्गुरूनाथ जी महाराज की शिवमहापुराण कथा के दौरान होता है कि लोग अनायास विश्वास नहीं कर पाते। कथा स्थल पर शिव की उपस्थित का आभास होना। असाध्य बीमारियों का अनायास ठीक हो जाना। शिवभक्ति की शक्ति का ही चमत्कार है। जहां भी सद्गुरूनाथ जी महाराज कथा सुनाने जाते हैं वहां पर लोग शिवभक्ति में ऐसे डूब जाते हैं मानों साक्षात भोलेनाथ उनके पास उनके दुःख हरण करने आए हो।


Monday, August 28, 2023

जो यज्ञ को त्यागता है उसे स्वयं परमात्मा त्याग देते है

 मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्रणनेत्रे।
न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥ 

भगवान शिव ज्ञान विवेक विचार और समाधि अर्थात् समाधान के देवता हैं। वस्तुतः अज्ञान ही जीवन की सबसे बड़ी बाधा है। शिव-तत्व अत्यंत प्रखर मुखर और चैतन्य रहता है। आओ अपने अंतःकरण को शुभ संकल्पों से भावित कर शुभता, सकारात्मकता, और स्वयं में अंतर्निहित अनंतता का जागरण करें !

सद्गुरूनाथ जी महाराज कहते हैं कि मन का एक जगह न ठहरना ये आज सबसे बड़ी समस्या है। लोग कहते हैं कि हम क्या करें? हमारा तो मन ही शिव भक्ति में एक जगह नहीं ठहरता है। आखिर कैसे स्थिर करें चंचल मन को। आप सभी इस बात को ऐसे समझें हमारे अंतर:करण के चार अंग हैं मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ! हम अंतःकरण को जो भी उद्देश्य देंगे, हमारा अंतरूकरण उसी उद्देश्य को पूरा करने में जुट जायेगा।  मन उसी पर मनन करेगा, चित्त में उसी का चिन्तन चलेगा, बुद्धि उसी का निश्चय करेगी अहंकार उसी में स्वयं को स्थापित कर लेगा।  अगर हमारा अंतःकरण किसी उद्देश्य की प्राप्ति में संलग्न न हो तो वह उद्देश्य कभी पूरा हो ही न पायेगा ! अंतःकरण ही वह उपकरण वह यंत्र है , जो हमें अस्तित्व ने हमारी सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए दिया है। हमारा मन यह भी जानता है कि अगर उसे ‘मोक्ष का उद्देश्य दिया जाए , तो वह उसका विषय उसका कार्य नहीं है।  स्वयं को  सत्य जानने के लिए न तो मन की आवश्यकता है , ना चिन्तन की , ना यह बुद्धि का विषय है ना अहं का।

मन को हमेशा शिवभक्ति में लगाए रखो, मन को व्यर्थ कार्य करने ही मन दो। आपको लगेगा कि मन धीरे-धीरे एकाग्रचित हो रहा है। जो भी जीवन की खुशियां हो उसे ढुढो और उसमें मन को आनंदित करो। 

शिवमहापुराण कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराजे ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि हमारी प्राचीन संस्कृति को अगर एक ही शब्द में समेटना हो तो वह शब्द है यज्ञ ! यज्ञ शब्द संस्कृत की यज धातु से बना हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है दान, देवपूजन एवं संगतीकरण। परमार्थ परायण कार्य को भी ‘यज्ञ’ कहते है।


यज्ञ कभी भी ‘स्वयं’ के लिए नहीं किया जाता है , बल्कि विश्व कल्याण के लिए किया जाता है।  सोचें , वेदों के बिना यज्ञ कहाँ होगा और वेदों के बिना यज्ञ कार्य भी कैसे पूर्ण हो सकता है ? जिस प्रकार मिटटी में मिला अन्न कण सौ गुणा हो जाता है, उसी प्रकार मन्त्र उचारण के साथ अग्नि में मिला पदार्थ लाख गुणा हो जाता है ! यज्ञ की महिमा अनन्त है। 

यज्ञ से आयु , आरोग्यता, तेजस्विता, विद्या, यश, पराक्रम , वंशवृद्धि, धन, धान्यादि सभी प्रकार के राज भोग, ऐश्वर्य , लोकिक एवं पारलोकिक वस्तुओं की प्राप्ति होती है।  यज्ञ अनेक प्रकार के होते हैं।  रूद्र यज्ञ , सूर्य यज्ञ , विघ्न विनायक गणेश यज्ञ , लक्ष्मी यज्ञ  श्री यज्ञ, लक्ष चंडी यज्ञ, भागवत यज्ञ, श्री लक्ष्मी यज्ञ , विष्णु यज्ञ , नवग्रह शान्ति यज्ञ आदि इस प्रकार अनेक प्रकार के यज्ञ होते आ रहे रहे हैं।

यज्ञों को वेदों में कामधेनु कहा गया है ! ‘यजुर्वेद’ में कहा गया है कि जो यज्ञ को त्यागता है उसे स्वयं परमात्मा त्याग देता है। यज्ञ के द्वारा ही साधारण मनुष्य देव योनी को प्राप्त करते हैं ! शास्त्रों में गायत्री को माता और यज्ञ को पिता माना गया है !


Sunday, August 27, 2023

भारत विश्व गुरू बने और विश्व का मार्गदर्शन करे : सद्गुरूनाथ जी महाराज

कथा के सातवें दिन सद्गुरूनाथ जी महाराज ने शिव भक्तों से कहा कि शिव नाम जपने से आपके जीवन की सारी बुराईयां खत्म हो जाएगी। आत्मा शुद्ध हो जाएगा। इतने भव्य पैमाने पर कथा करवाने के लिए गुरूदेव ने सभी आयोजकों को धन्यवाद किया और कहा कि आप लोगों के अथक प्रयास से कार्यक्रम इतना सफल और सुसज्जित ढंग से संपन्न हो गया। 


पत्रकारों के साथ बातचीत में सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि भारत देश में जिस प्रकार सनातन धर्म का उत्थान हो रहा है इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं कि भारत पुनः विश्व गुरू बनेगा।  अलजेबरा, स्कवायर रूट, समय के सिद्धांत, आर्किटेक्चर, मेटालर्जी यहां तक की अंतरिक्ष विज्ञान के सिद्धांत भी वेदों से मिले हैं। वेदों में बहुत सी ऐसी बातें लिखी गई है। जो आज विश्व भी मान रहा है। मंडल ग्रह लाल है, चंद्रमा के दक्षिण धु्रव पर 15 दिन रात्रि और 15 दिन उजाला रहता है। ये धर्मग्रंथों में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के सिद्धांत पर आधारित है। 

चंद्रमा के बारे में अनेक ऐसी बातें है जो वेदों में पहले ही बताई जा चुकी है। अगर इस पर रिसर्च हो तो सारे रहस्य अपने आप खुलते चले जाएंगे। जो लोग कंम्प्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सीखना चाहते हैं उनके लिए संस्कृत भाषा काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। 

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, भौतिक विज्ञान आदि संस्कृत भाषा में लिखे गए थे लेकिन अभी तक इस पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है। एक किताब है सूर्य सिद्धांत, यह किताब आठवी शताब्दी की है। मैं आश्चर्यचकित हुआ किस उस किताब में सौर उर्जा और टाईम टेबल के बारे में बताया गया है। 

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा का विशेष स्थान है। चंद्रमा मन, वस्तु, सुख धन, संपदा, माता आदि का कारण ग्रह है। जहां तक दिशा की बात है तो यह उत्तर-पश्चिम दिशा के स्वामी है। चंद्रमा सभी ग्रहों में सबसे छोटा है। लेकिन गति में सबसे तेज, चंद्रमा किसी भी राशि में ढ़ाई दिन तक रहता है। फिर यह दूसरे चिन्ह में घूमता रहता है।

चंद्रमा पर जहां चंद्रयान लैंड हुआ है उस जगह का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिव-शक्ति रखा है यह बड़े ही सौभाग्य की बात है। देवाधिदेव महादेव जिन्होंने पूरे विश्व का निर्माण किया है। जिन्होंने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारणा किया हुआ है। उस चंद्रमा की धरती को शिव-शक्ति नाम देने से देव चंद्रमा भी अपने आप को प्रफुल्लित महसूस कर रहे होंगे। विज्ञान के क्षेत्र में ये भारत की बड़ी उपलब्धि है। देश एवं समाज ऐसे ही उन्नति करता रहे जिससे भारत पुनः विश्व गुरू बने और समूचे विश्व का मार्गदर्शन कर सके।

Saturday, August 26, 2023

कलयुग की हर समस्या का समाधान मौजूद है शिवमहापुराण में

 जयपुर शहर के श्री गोविंद जी मंदिर में आचार्य सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा शिवमहापुराण कथा के छठे दिन सद्गुरूनाथ जी महाराज ने अनेक ज्ञान की बातों शिव भक्तों को बताई और कहा कि शिव महापुराण कथा समुद्र से भी गहरी है। समुद्र में डूबोगे तो मर जाओगे और शिव महापुराण में डुबोगे तो तर जाओगे। इन्होंने कहा कि कोई कलयुग की ऐसी समस्या नहीं है जिसका निदान शिव महापुराण में न मिलता हो। शिव महापुराण कथा सबके लिए है। यहां जो मोती यानि शिव के रूप का वर्णन सुंनता है उसके दुःख स्वतः ही दूर होने शुरू हो जाते हैं। शिव जी विश्वास और भक्ति के भूखे है। उन पर से भरोसा छोड़ा तो भोलेनाथ भी तुमको छोड़ देंगे। 

कथा के दौरान गुरूदेव ने कहा कि टीवी और सिनेमा से आ रही गंदगी से सदा दूर रहने का प्रयास करें। सनानत समाज में सीरियल एवं सिनेमा से बहुत सी बुराईयां आ गई है। जिससे संयुक्त परिवार टूट रहे है लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे है जरूरत है वेद, शिव महापुराण एवं गीता को पढ़ने की इनकी बातों को पढ़कर और सुनकर ही हिन्दू धर्म में आ रही कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। अपनी हिन्दू संस्कृति और इसके द्वारा बताए गए संस्कार को अपनाकर ही मानव उत्थान कर सकता है। तलाक जैसा कोई शब्द हिन्दू ग्रंथों में नहीं मिलता, यहां तो सात जन्मों का परिणय बंधन होता है। 

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि शादी के वक्त कुंडली मिलान बहुत आवश्यक है लेकिन कुंडली किसी विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य से ही दिखाना चाहिए। अगर आपस में गुण नहीं मिले तो शादी के बाद होने वाले बच्चे को मानसिक कमजोरी, शारीरिक कमजोरी एवं अनेक शारीरिक व्याधियां होती है।

सदगुरूनाथ जी महाराज ने कथावाचन के दौरान बताया कि भगवान तुम्हें जब कोई काम देता है तो उसके लिए सामर्थ्य भी प्रदान करता है।  दुःख और सुख तो संत-महात्माओं के भी जीवन में आते हैं लेकिन वे भक्ति का दामन कभी नहीं छोड़ते हैं। सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि दीया रातभर अंधेरे से लड़ सकता है तो भगवान का दिया इंसान जीवन की समस्याओं से कैसे नहीं जीत सकता। 


सद्गुरूनाथ जी महाराज ऐसे धार्मिक गुरु हैं, जिनके मधुर भजन और प्रवचन सुन आत्मा भीतर से आनंदित होती है। सद्गुरूनाथ जी महाराज भगवान शिव के अनन्य भक्त हैं और शिवमहापुराण के महान कथावाचक हैं. इन्होंने देश-दुनिया में लोगों को आध्यात्मिकता का अनुभव कराया. ये शिव महापुराण कथा के दौरान दुःख निवारण शिविर का आयोजन भी करते हैं जिसमें आने वाले लोगों के जीवनम में आ रही समस्याओं का ये चुटकी में हल बता देते हैं। जिससे अनेकों लोग लाभान्वित होते हैं।



Friday, August 25, 2023

शिव महापुराण कथाः सद्गुरूनाथ जी महाराज ने बताया भाग्य और कर्म में अंतर

 परम श्रद्धेय दिव्यदर्शी कथावाचक सतीश सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा श्रावण मास के पवित्र महीने में श्रावणी शिव महापुराण कथा का आयोजन जयपुर (राजस्थान) में श्री गोविंद जी में किया जा रहा है। दूर-दराज के लोगों की भीड़ लगातार कथा स्थल पर पहुंच रही है। लोगों का उत्साह उस समय चरम पर पहुंच जाता है जब भविष्यवक्ता, परम शिवभक्त सद्गुरूनाथ जी महाराज कथा स्थल में पहुंचते हैं हर कोई व्यक्ति उनकी तरफ श्रद्धा के भाव से देखता रहता है हर व्यक्ति उनसे मिलने को व्याकुल रहता है। सद्गुरूनाथ जी महाराज भी अपना कीमती वक्त निकालकर लोगों की व्यथा जरूर सुनते हैं और हर संभव उनकी मदद करते हैं। 


कथा के पांचवे दिन सद्गुरूनाथ जी महाराज ने बताया कि भाग्य और कर्म में ये अंतर होता है। उन्होने कहा कि आपका जीवन 3 मूल चीजों पर टिका हुआ है। आपका वर्तमान, आपका भविष्य और आपका भूतकाल। ये तीन की संख्या काफी महत्वपूर्ण ये तीनों मिलकर आपके भाग्य का निर्माण करती हैं। 

आपके भूतकाल जिसने निर्माण किया आपके वर्तमान को और आपका वर्तमान जो निर्माण करेगा भविष्य को। जितना अच्छा या बुरा किया है वो घूमकर आपके पास जरूर आता है। भगवान के प्रति अपना भाव बिल्कुल स्पष्ट रखें जैसी आप भगवान के प्रति श्रद्धा रखेंगे वैसे ही सुख-समृद्धि आपके जीवन में आती रहेगी। अगर भोलेनाथ की प्रति श्रद्धा रखेंगे तो कर्म के फल आपको जरूर मिलेंगे। अगर जीवन में प्रारब्ध आपका काम करें तो जीवन में शत-प्रतिशत उन्नति हो ही जाती है।


ज्ञात हो कि सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा संपूर्ण भारतवर्ष में शिव महापुराण कथा द्वारा लोगों एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। अनेक जगह इनके शिव महापुराण कथा हुए हैं जहां लोगों ने अपार प्रेम सद्गुरूनाथ जी को दिया है। आज देश के प्रत्येक प्रांत के लोग सोशल मीडिया साईट हो या फिर धार्मिक चैनल सद्गुरूनाथ जी महाराज को अवश्य देखते एवं सुनते हैं। 


सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि संसार में मनुष्य शिव महापुराण की कथा के सत्संग में बैठ जाता है तो उसकी कीमत बढ़ जाती है। जैसे पारिजात, कनेर, शमी, मंदार, धतुरा आदि पुष्प सब सस्ते हैं इनकी कीमत ज्यादा नहीं है किंतु जब यह पुष्प महादेव को अर्पित हो जाते हैं तो वह सभी अनमोल बन जाते हैं। 

Thursday, August 24, 2023

राष्ट्र के बौद्धिक एवं आत्मिक बल में वृद्धि के कारण हुई चंद्रयान विजय: सद्गुरूनाथ जी महाराज

जयपुर में पवित्र सावन मास पर आयोजित श्रावणी शिवमहापुराण कथा में शिव भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। कथा के पहले दिन से ही लोगों ने बढ़-चढ़कर शिवमहापुराण कथा में भाग लिया। कथा के दौरान आचार्य सतीश सद्गुरूनाथ जी ने बताया कि श्रावण मास में शिव पुराण की कथा के श्रवण करने से कई गुणा यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है। 


गुरूदेव ने कहा कि जयपुर की धरती सस्कृति और संस्कारों की धानी है। यहां पर भांति-भांति के लोग एक साथ रहते हैं जैसे बाबा शिव के साथ सम और विषम दोनों एक साथ रहते हैं। जहाँ हर धर्म सम्प्रदाय का सम्मान और मान हो एवं गरीब अमीर सब मिल कर रहें और जनमानस में प्रेम की भावना हो ये सब राजस्थान की पहचान है। 

पत्रकारों के साथ बातचीत में गुरूदेव ने कहा कि “गुरू शंकर रूपिणौं “। गुरू जैसे दिशा दिखाते हैं वैसे ही महादेव मार्गदर्शन करेंगे। देश ने चॉद की धरती पर अपना कदम रख दिया है। राष्ट्र के बौद्धिक एवं आत्मिक बल में ऐसे ही वृद्धि होगी । चारो तरफ खुशियों का माहौल रहेगा। शिव भक्ति करने वालों को मनोरथ की सिद्धि होगी। 

गौरतलब है कि शिव महापुराण कथा के दौरान भगवान शिव का वर्णन, भक्ति के गूढ़ रहस्य, भगवान शिव को प्रसन्न करने के तरीक़े और अद्धनारीेश्वर शिव के चमत्कारिक रहस्यों के बारे में बताया जा रहा है। 

कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि आपका शरीर कीमती है लेकिन आपकी सांसे उससे ज्यादा कीमती है। जब तक ये चल रही है तब तक ही तुम हो। आज हजारों तरीके के सौंदर्य प्रसाधन बिक रहे है मार्केट में इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन शरीर से ज्यादा आत्मा को सुंदर रखना भी आपकी जवाबदेही है। ये भक्ति भाव से हो सकता है दूसरा कोई तरीका नहीं है। 

आयोजकों का मानना है कि इस महाआयोजन से लोगों में आध्यात्मिक,बौद्धिक रूप से नई चेतना का संचार होगा और वो कर्म क्षेत्र में बेहतर योगदान दे पाएंगे। लोग शिव की अलौकिक शक्तियों को जान भी पाएंगे और श्रवण मास में भगवान शिव की महिमा कथा ओर उनकी भक्ति का वर्णन सुन जीवन धन्य करेंगे। 

आज के तनाव भरे जीवन में हर मनुष्य प्रेम और शांति की खोज में रहता है और ऐसे में उनके विचार मनुष्य के मन को सुकून और प्रेम एवं आत्मीयता का अनुभव करवाते है। गुरु जी के ज्ञान की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह बड़ी से बड़ी बात को बहुत सहजता से कह देते है। 


Wednesday, August 23, 2023

सद्गुरूनाथ जी ने बताया इन कामों को करने से जीवन में होती है बरकत

जयपुर। जयपुर के श्री गोंिवद जी मंदिर में आयोजित श्रावणी शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भी काफी संख्या में शिवभक्त ने आकर सद्गुरूनाथ जी महाराज के मुखारविन्द से श्रावण के पवित्र मास में शिवमहापुराण का श्रवण किया। गुरूदेव ने शिवमहापुराण कथा के ऐसे-ऐसे प्रसंग सुनाए जिसको सुनकर भक्त खुशी से नाचने लगे। चारों तरफ कथा स्थल का माहौल शिवमय नजर आ रहा था। पूरी कथा के दौरान सारे लोगों ने एकाग्रचित होकर कथा को सुना। कथा का श्रवण करने के लिए कैबिनेट मंत्राी महेश जोशी जी ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिवमहापुराण कथा सुनने का एक अलग ही धार्मिक महत्व है। 


शिवमहापुराण कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने श्रावणी शिव महापुराण की विशेषतता का धार्मिक रूप से विवेचन किया उन्होंने कहा कि श्रावणी शिव महापुराण का मतलब प्रकृति का वास्तविक दर्शन है। श्रावण संपन्नता का नाम है। श्रावण खुशहाली का नाम है। इस समय प्रकृति में चारों तरफ एक विशेष दिव्यता का दिखाई देती है। मानो भगवान शिव के आगमन के लिए प्रकृति भी सुंदर हो गई। 

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि पूरी पृथ्वी गोल नहीं है बल्कि ये शिवलिंग के आकार की है। आकाश कटोरे जैसा है मानों कटोरे के अंदर शिवलिंग रखा है और उस पर जलाभिषेक बारिश के रूप में उस पर होता रहता है और पूरी पृथ्वी पुष्पित और प्लवित होती है।  श्रावण मास में जो जिस कामना से पूजा, पाठ, यज्ञ इत्यादि करता है उसको उसी तरह फल देने श्रावण मास में महादेव आते हैं। 

गुरू के महत्व को बताते हुए सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि जिन व्यक्तियों के जीवन में गुरू ने प्रवेश नहीं किया उनके जीवन में अधूरापन रहता है। गुरू पृथ्वी पर साक्षात शंकर के स्वरूप में है। अगर आपके जीवन में गुरू नहीं है तो आपको कन्यादान का फल नहीं मिलता। शिव महापुराण के अनुसार गुरू के बिना तप का जाप का पूजा पाठ का पूर्ण फल नहीं मिलता है। गुरू ही आपके जीवन में सही मार्गदर्शन करते हैं। जब तुम्हारे जीवन में गुरूभक्ति का बल होता है तो सब कुछ परमात्मा खुद ही देने लगते हैं। आपको कोई चीज मांगने की जरूरत नहीं रहती। ईश्वर स्वयं आपका सहायक हो जाता है। 


जिसके घर में बरकत नहीं हो रही है हो अपनी जिंदगी में धार्मिकता एवं ईमानदारी पूर्वक अपने जीवन के सारे काम करें। प्रभु का सिमरन करें। जैसा निर्माण आप अपने व्यक्तित्व का करेंगे उसी तरह के फल मिलेंगे। प्रभु सब देखते रहते हैं कि जिंदगी में तुमने अपना काम ईमानदारीपूर्वक किया कि नहीं। प्रभु ने जो काम आपके निर्मित भेजा है उसी में पूरी पारदर्शिता के साथ करो। तभी जिंदगी में बरकत आनी शुरू होगी।

Tuesday, August 22, 2023

सद्गुरूनाथ जी महाराज के मुखारविन्द से निकली शिव भक्ति की अमृत जलधारा

जयपुर। श्रावणी शिव महापुराण कथा के दौरान जिस प्रकार जयपुर के लोगों ने अपने भक्ति भाव का परिचय दिया वो अद्भुत है। कथा स्थल के आसपास भक्ति की ऐसी जलधारा प्रवाहित हो रही है। जैसे हर कोई व्यक्ति शिव की आराधना में अपने आप को सराबोर करना चाह रहा हो। सद्गुरूनाथ जी महाराज के शिव महापुराण कथा की चर्चा आज देश के हर गलियारे में होती है। इनके श्रीमुख से शिवमहापुराण की आध्यात्मिक बातें जब निकलती है तो लोग टकटकी लगाकर सुनते रहते हैं। बहुत सी ऐसी बातें गुरूवर बताते है जो भगवान शिव के बारे में लोगों ने आज तक नहीं सुनी होती है। 


सद्गुरूनाथ जी महाराज ने शिवमहापुराण कथा के दौरान कहा कि आप भक्ति करो,  सत्कर्म करो लेकिन छल, प्रपंच, अभिमान से दूर रहो। जिसके मन में हो छल, उसको क्या करेगा एक लोटा जल। हजारों प्रकार के छल-ईर्ष्या, द्वेष लेकर अगर आप बैठे हैं तो पहले भगवान की भक्ति में जुड़ने के लिए उसे साफ कीजिए क्योंकि स्वच्छ आत्मा में ही भगवान का वास होता है। 

शिवमहापुराण के विषय में सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि ये एक कल्प वृक्ष के समान है। सही मन और श्रद्धा से आप जो कुछ भी मांग लेंगे उसे देवाधिदेव महादेव जरूर देंगे। इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है। कितनी भी बड़ी संकट आए आप भोलेनाथ की शरण में अगर जाते हैं तो भगवान शिव आपको कभी निराश नहीं करेंगे। 


कथा के दौरान उन्होंने बताया कि लोभ ही पाप का कारण है, मनुष्य को हमेशा संतोषी होना चाहिए। लोग के बहुत से दुष्परिणाम होते हैं। जीवन में पहले लोभ आता है तभी आपसे कोई गलती होती है। लोभ किसी भी प्रकार के हो सकते हैं। शिव के चिंतन करने से आपकी सारी परेशानियों चुटकियों में दूर जाएगी। 


कथा के दौरान गुरूदेव ने बताया कि धनवानों के नए रिश्तेदार पैदा हो जाते हैं ये लोग अक्सर बोलेते है जो गलत बात है। धनवानों के अपने रिश्तेदार भी छूट जाते हैं। धनवानों को दुनिया में सबसे ज्यादा बातें सुनने को मिलती है। धनवान होना समान्य बात नहीं है, धनवान होना बड़े त्याग की बात है। धनवान भी बेहद दुखी होते हैं 24 घंटे बेचारे काम करते रहते हैं। मजदूर सिर्फ 8 घंटे काम करता है। व्यापारी 24 घंटे काम और सोते वक्त भी काम के सिलसिले में फोन पर लगा रहता है।

कथा के पहले दिन ऊँ नमः शिवाय एवं सद्गुरूनाथ जी की जय के जयकारे से गूंजा पूरा कथा स्थल

जयपुर। परम शिव भक्त, आध्यात्मिक गुरू एवं प्रसिद्ध कथावाचक सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा श्रावणी शिवमहापुराण कथा की शुरूआत श्री गोंिवद जी मंदिर में हुई। कथा की शुरूआत कलश यात्रा के साथ हुई। जिसमें काफी संख्या में शिवभक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने बताया कि जब तुम कलाश उठाते हो या कलश यात्रा में शामिल होते हो इतने मात्र से तुम्हारे कुल के सारे दोष मिट जाते हैं एवं दुर्भाग्य दूर भागने लगाता है। 


शिवमहापुराण कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने ऐसी-ऐसी अनोखी एवं प्रेरणादायक बातें बताई कि सारे भक्तजन खुशी से नाचने लगे। चारों तरफ भक्ति का एक अनुपम महौल दिखाई दे रहा था। सब भगवाने भोलेनाथ की भक्ति में अपने आप को डूबो देना चाहते थे। सद्गुरूनाथ जी महाराज के श्रीमुख से भक्ति की अविरल धारा इस प्रकार बह रही थी कि मानो स्वयं भगवान शंकर वहां उपस्थित होकर ये दिव्य बातें बता रहे हो। 

शिवमहापुराण कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि भगवान राम हो या फिर कृष्ण ये समूचे विश्व में पूजे जाते हैं लेकिन इनके परिवार या बेटे की प्रतिमा एवं देश में कहीं नहीं होती है। लेकिन भगवान शिव एवं उनके परिवार के जितने भी सदस्य हैं वो पूरे भारतवर्ष और यहां तक की विदेशों में भी पूजनीय है। भगवान गणेश की पूजा से पहले तो कोई पूजा सिद्ध ही नहीं हो सकती। भगवान भालेनाथ की महिमा का गुणगाान देव-दानव, मनुष्य, भूत-पिशाच सभी करते हैं। जब देवताओं पर कोई संकट आता है तो भोलेनाथ ही उसको दूर करते हैं। 


सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि कलयुग में झूठ का ही कारोबार है। चारो तरफ झूठ, हिंसा, कलह है। लोग इसके इतने आदि हो चुके हैं कि वो इंसानों के रग-रग में ये अवगुण समा चुका है। सीधा और सरल उपाय तो एक ही है विश्व में भगवान महादेव की गाथा शिवमहापुराण की कथा का श्रवण करें और उनकी पूजा करें। उसका मनन करें। अश्वमेघ यज्ञ कराने के जितना फल मिलता है अगर निष्ठा पूर्वक शिवमहापुराण कराया जाए। 


समय के सदुपयोग पर भी गुरूदेव ने प्रकाश डाला और कहा कि हमेशा अपने कीमती समय का ध्यान जरूर रखें। सारा समय का ही खेल है। समय निकालकर अपने आप को शिव भक्ति में भी जरूर लगाएं जिससे आपका जीवन सफल हो सके।

Monday, August 21, 2023

व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं शिव: सद्गुरूनाथ जी महाराज

अगर आप अपने घर के कलह से परेशान है या अपने व्यवसाय को लेकर चिंतित है या घर के वास्तु दोष से दुखी है तो परेशान मत होइये बल्कि भोलेनाथ की पूजा कीजिए, आपके सारे कष्ट दूर हो जायेंगे। शिव की पूजा से जिन्दगी से हर तरह की परेशानियों को मिटाया जा सकता है क्योंकि भगवान शिव त्रिदेवों में एक देव हैं, जो महादेव और भोले-भंडारी हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं।  भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं।

शिव ही सत्य है, और सत्य ही सुंदर है, शिव अपने इस स्वरूप द्वारा पूर्ण सृष्टि का भरण-पोषण करते हैं। इसी स्वरूप द्वारा परमात्मा ने अपने ओज व उष्णता की शक्ति से सभी ग्रहों को एकत्रित कर रखा है।

शिव की अष्टमूर्ति

क्षितिमूर्ति -सर्व

जलमूर्ति -भव

अग्निमूर्ति -रूद्र

वायुमूर्ति -उग्र

आकाशमूर्ति -भीम

यजमानमूर्ति -पशुपति

चन्द्रमूर्ति -महादेव

सूर्यमूर्ति -ईशान


शिवलिंग: शिवलिंग का अर्थ है शिव का आदि-अनादी स्वरुप। शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्द पुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।


भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती)

शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है जो कि प्रकृति की समानता का मानक भी है, जिसका अर्थ है कि इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान है।


शिवस्वरूप : 

शिवलिंग के महात्म्यका वर्णन करते हुए शास्त्रों ने कहा है कि जो मनुष्य किसी तीर्थ की मृत्तिका से शिवलिंग बना कर उनका विधि-विधान के साथ पूजा करता है, वह शिवस्वरूप हो जाता है। शिवलिंग का सविधि पूजन करने से मनुष्य सन्तान, धन, धन्य, विद्या, ज्ञान, सद्बुद्धि, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति करता है।

Sunday, August 20, 2023

नाग पंचमी: नागदेवता की पूजा का है आध्यात्मिक महत्व : सद्गुरूनाथ जी महाराज

 सावन के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि यानी 21 अगस्त को नाग पंचमी मनाई जाएगी। कुछ राज्यों में ये पर्व कृष्ण पक्ष को मनाया जाता है। यह पर्व चतुर्मास में मनाया जाता है, जिसके दौरान नकारात्मक ऊर्जाओं को  नियंत्रित करने के लिए संयम, व्रत, उपवास और दान-पुण्य जैसे सकारात्मक साधनों को अपनाया जाता है। भगवत पुराण के अनुसार नाग के 12 रूप हैं जो सूर्य के रथ को खीचते हैं। इन 12 नागों अनंत, वासुकी, शेष, पदम, कम्बल, ककोंटक, अश्वतर, धृतराष्ट, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल नाग की पूजा का विधान है।  


अग्निपुराण में 80 प्रकार के नाग कुलों के बारे में बताया गया है। भगवान शिव के साथ वासुकी जुड़ा है तो भगवान विष्णु के साथ शेषनाग। ऋग्वेद में पृथ्वी को सर्प रजनी माना गया है। सर्प मानसिक और आध्यात्मिक पटल पर कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक है। आध्यात्मिक स्तर पर नाग हमारे अहंकार या ईगो का प्रतिबिंब भी है। नाग पंचमी का पर्व दरअसल अहंकार का त्याग करना और विनम्र बनाना सिखाता है। 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह हमारे भीतर कुंडली के रूप् में बैठी एनर्जी का भी प्रतीक है जिसे जाग्रत कर कायनेटिक एनर्जी में परिवर्तित किया करना पड़ता है।  स्थिर ऊर्जा से पूर्ण ऊर्जा तक पहुंचने का यह रास्ता सर्पिलाकार है।  इस प्रक्रिया को कुंडलिनी जागरण कहते हैं।  शेषनाग पर योग निद्रा में लीन भगवान विष्णु स्थिर उर्जा के प्रतीक हैं तो योगी स्वरूप शिव पूर्ण ऊर्जा के प्रतीक हैं। नागलोक सृष्टि व चेतना के निम्नतम स्तर या समकर्षण है। वहीं सूर्य मंडल की आभा से पूर्ण आदित्य उच्चतम लोक है। इन दोनों लोकों की श्याम और श्वेत उर्जाओं के बीच संतुलन बैठाने की एक प्रक्रिया है नागदेवता की पूजा। 

Saturday, August 19, 2023

गागर में सागर है सदगुरूनाथ संदेश (वाणी महादेव की पत्रिका )

 श्री सद्गुरूनाथ धाम परिवार तरफ से निकलने वाली पत्रिका सद्गुरूनाथ संदेश (वाणी महादेव की) में आध्यात्म की जानकारी, शिवमहापुराण के अचूक उपाय, ज्योतिष द्वारा कैसे अपनी समस्याओं से निजात मिलेगी ये सभी बातें विस्तार पूर्वक बतायी गई है।


 इसके अलावा सद्गुरूनाथ जी महाराज के विभिन्न कार्यक्रमों में बताए गए जीवनपयोगी बातों की जानकारी पत्रिका के माध्यम आपको मिलेगी। दूर-दराज के रहने वाले लोग जो किसी कारणवश सद्गुरूनाथ जी महाराज के शिवमहापुराण कथा में नहीं आ पाते हैं वो पत्रिका के माध्यम से जुड़ सकते हैं उनको श्री सद्गुरूनाथ धाम परिवार की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पत्रिका के माध्यम से दी जाएगी। 


इस माह अगस्त के अंक में आपको महादेव शिव के बारे में विशेष जानकारी दी गई है। हम आशा करते हैं कि आपको सद्गुरूनाथ संदेश पत्रिका में वो सारी अद्भुत जानकारी मिलेगी। जिससे आपका जीवन सुखमय होगा। सद्गुरूनाथ जी महाराज के आगामी शिवमहापुराण कथा एवं गुरूजी के अनमोल वचन को आप पत्रिका के माध्यम से पढ़ सकेंगे। 


उपासना, साधना, विद्या अध्ययन, श्रेष्ठ साधनों का प्रयोग करना ही ‘धर्म’ है

 ‘’गरीब होना कोई गुनाह तो नहीं ? तेरे गुरु के सिवा तेरा दर्द किसी ने सुना भी नहीं ? जो ज़िद पर आ जाएँ रुख मोड़ दें तूफानों के ! तुमने अभी ताकत कहाँ देखे हैं शिव भगवान के। 

मेरा एकमात्र उद्देश्य है शिवत्व से दुनिया को जोड़ना! मैं ऐसे लोगों को देखना चाहता हूँ जब चुभन तो किसी और को हो, पर पीड़ा उनको हो, रोये तो कोई और, लेकिन आंसू उनके निकल आयें! मैं ऐसे शिष्य को देखना चाहता हूं, जो अपने कार्यालय में बेठे हों , वहां कार्य भी कर रहे हों, खेत में परिश्रम कर रहे हों।  जो जीवन में पूरी सघनता के साथ खड़े हों,  तनिक सोचो तुम साधक हो गुरू भक्ति करते हो, अनुभव भी होते हैं ,   चमत्कार भी होते हैं। पर स्वयं को पहचानते नहीं हो, जो मैं तुममे देखता हूँ वह तुम्हे स्वयं में नहीं दिखता ! 


 साधक हैं जिनका सीधा सम्बन्ध भगवान से है, ब्रह्माण्ड से है, अन्तरिक्ष से है ! भगवान की उनपर अति कृपा है ! भगवान उनसे ‘ध्यान’ में भेंट करते हैं और पूरे ब्रह्माण्ड का मायाचक्र उन्हें समझा देते हैं।  धन्य हैं ऐसे गुणी शिष्य जिनकी श्रेणी सर्वोत्तम है। कुछ शिष्य ऐसे हैं ऐसे भी हैं जिनकी गति वायुयान से भी कहीं तेज़ है।  वह जितनी तीव्र गति से प्रकट होते हैं , उससे भी अधिक तीव्र गति से अद्रश्य हो जाते हैं ! इसीलिए तो कहता हूँ ‘शिवत्व एक रंग बिरंगे फूलों का गुलदस्ता है ! इसमें भाँती भाँती के फूल हैं !

आज वर्तमान में मानव के समक्ष प्रश्न यह है कि वह संसार में कहाँ से आता  है ? और बाद में मृत्यु होने पर कहाँ चला जाता है ? उसका जन्म लेने का कारण क्या है ? मनुष्य जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसके पास क्या क्या साधन हैं ? जिसका उपयोग करके वह निज उद्देश्य की प्राप्ति कर सकता है।

 वैदिक शास्त्रों ने मानव जीवन का प्रथम उद्देश्य एवं लक्ष्य, धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष की प्राप्ति को बतलाया है ! कहा गया है कि सिद्धि से साक्षात्कार ही साधक के जीवन का उद्देश्य है जिसे प्राप्त कर लेने पर ‘संतुष्टि’ की प्राप्ति होती है। सिद्धि के लिए साधक को स्वयं का आचरण कैसा बनाना होता है। 

शिव महापुराण मेें कहा गया है कि अधर्म, अविद्या, कुसंग, कुसंस्कार, बुरे व्यसन से अलग रहना और सदैव सत्य बोलना, विद्या, पक्षपात रहित न्याय, धर्म की वृद्धि करना, गुरु की आज्ञा का पालन करना है।  उपासना , साधना , विद्या अध्ययन , श्रेष्ठ साधनों का प्रयोग करना ही ‘धर्म’ है ! जो कुछ भी करें सदैव पक्षपात रहित  न्याय और धर्म के अनुसार ही करें ! इन सब साधनों से ‘मुक्ति’ होती है ! इसके विपरीत कार्यों से जन्म और मरण का चक्र शुरू होता है 

Friday, August 18, 2023

’ज्योतिष शास्त्र' पुर्णत: प्रमाणिक एवं सत्य ज्ञान है।

हमारा पूरा जीवन ग्रहों नक्षत्रों एवं राशियों पर आधारित है। इनके योग से ही जीवन में सुख-दुःख आते रहते हैं। बहुत से ऐसे मूर्ख व्यक्ति हैं जो हमारे ऋषि मुनियों के प्रमाणिक ज्ञान को नहीं मानते हैं एवं ज्योतिष के बारे में दुष्प्रचार करते हैं। मेरा ज्योतिष पर रिसार्च करने के बाद ये अनुभव है कि ज्योतिष ही एक ऐसा ज्ञान है जिसके माध्यम से जीवन की समस्या के कारण को जानकर उपाय, साधना, दान एवं रत्नों के द्वारा अपने समस्या का समाधान आप आसानी से पा सकते हैं। 


 हमारे देश में जितने भी महान ऋषि हुए हैं उन्हें ज्योतिष एवं साधना दोनों का ज्ञान था । भारतीय ज्योतिष के विकास का इतिहास बहुत पुराना है। अत्यन्त प्राचीन समय में ब्रह्मा जी ने स्वयं ज्योतिष शास्त्र को प्रकट किया था तथा नारद मुनि को ज्योतिष का ज्ञान दिया, जिसका वर्णन नारद पुराण में है।  नारद मुनि ने ये ज्ञान पाराशर ऋषि को दिया  । उसके बाद पाराशर ऋषि ने मैत्रेय ऋषि को ये ज्ञान दिया । इसके बाद  व्यास , वशिष्ठ , अत्रि ,  कश्यप , नारद , गर्ग , मरीचि , मनु , अंगिरा , लोमश , पौलिश , च्यवन, यवन , भृगु एवं शौनक आदि महर्षियों नें इस ज्ञान का विकास किया और आगे बढ़ाया । ईश्वर ने मनुष्य को ज्योतिष के रूप में एक वरदान दिया है जिसके माध्यम से अपने दुःखों को दूर कर सकता है । पर शायद वो दुर्भाग्यशाली हीं होते हैं जो अपने अज्ञानता के कारण इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। 

  ज्योतिष के माध्यम से हम अपने जीवन मे होने वाली सभी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। ज्योतिष के माध्यम से हम अपने भाग्य को पूर्णतः नहीं बदल सकते हैं  परंतु ये बात भी  सत्य है की हम ज्योतिष के ज्ञान, उपाय एवं साधना के द्वारा अपने जीवन में होने वाली परेशानी एवं दुखों को 80 प्रतिशत तक  दूर कर सकते हैं । 

ज्योतिष शास्त्र कहीं भी ऐसा नहीं कहता है की कर्म मत करो और भाग्य के भरोसे बैठे रहो । ज्योतिष का मतलब ये नहीं है की आप बिना कर्म किए ही करोड़पति बन जाएंगे । जिनका भाग्य प्रबल रहता है उन्हे कम मेहनत में भी ज्यादा सफलता प्राप्त हो जाती है , परंतु कई लोग बहुत कठिन परिश्रम करते हैं फिर भी उन्नति नहीं होती है  जिसका कारण है उनका भाग्य कमजोर  होना। 

यदि किसी व्यक्ति  का भाग्य कमजोर है तो इसका मतलब ये होता है की उसे परिश्रम का पूर्ण फल नहीं प्राप्त हो रहा है। यदि उसके भाग्य से संबन्धित ग्रह को प्रबल कर दिया जाए तो परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त होने लगेगा।  यदि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब है या कोई बीमारी है और ज्यादा समय तक इलाज करने पर भी ठीक नहीं हो रहा है तो इलाज के साथ ज्योतिष का उपाय भी किया जाए तो जल्द ठीक हो सकता है । यदि किसी व्यक्ति के  जन्म पत्रिका का विश्लेषण बचपन में ही करा लिया जाए  तो उसके जीवन में आनेवाली समस्याओं के बारे में जानकार, बचपन से हीं उपाय करके जीवन मे आनेवाली समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। 

यदि किसी बालक का शारीरिक एवं मानसिक विकास ठीक से नहीं हो रहा हो तो बचपन में ही उसके जन्मपत्रिका का विश्लेषण कराकर उपाय किया जाए तो उसे ठीक किया जा सकता है । इसी प्रकार गृहस्थ जीवन से संबन्धित संतान से संबन्धित , धन से संबन्धित  इत्यादि सभी समस्याओं का समाधान ज्योतिष के माध्यम से किया जा सकता है।ज्योतिष एवं साधना जन्मपत्रिका  इस तरिके से बनाया जाता है , जिसे आप आसानी से पढ़ कर समझ सक्ते हैं ।

 इस पत्रिका का फलादेश कम्पयूटर द्वारा नहीं किया जाता है । इसमे मैं अपने अनुभव एवं ग्रन्थों के माध्यम से फलादेश करता हूँ । इसमें प्रत्येक ग्रह का अलग अलग फलादेश दिया गया है जिससे आप ये जान सक्ते हैं कि कौन सा ग्रह आपके लिए कारक है और कौन सा अकारक है। इसके बाद दो या दो से अधिक ग्रहों की युति से बनने वाले योग एवं उनके प्रभाव के बारे में बताया जाता है । यदि आपके जीवन में कोई विशेष परेशानि है तो उसके बारे में विशेष रूप से उसके समाधान के बारे में बताया जाता है । अंत में सभी ग्रहों का अलग -अलग उपाय बताया जाता है । जन्मपत्रिका बनाने के बाद आप मुझसे मिलकर या फ़ोन से सम्पर्क करके अपनी पत्रिका के बारे में विस्तार से समझ सकते हैं ।

Thursday, August 17, 2023

’स्तोत्र और मंत्र में ये होता है अंतर, अच्छी तरह से समझ लें: सद्गुरूनाथ जी महाराज

किसी भी देवता की पूजा करने से पहले उससे सबंधित मन्त्रों को गुरु की सहायता से सिद्ध किया जाना चाहिए। स्तोत्र:  किसी भी देवी या देवता का गुणगान और महिमा का वर्णन किया जाता है। स्त्रोत का जाप करने से अलौकिक ऊर्जा का संचार होता है और दिव्य शब्दों के चयन से हम उस देवता को प्राप्त कर लेते हैं और इसे किसी भी राग में गाया जा सकता है। स्त्रोत के शब्दों का चयन ही महत्वपूर्ण होता है और ये गीतात्मक होता है।


 मन्त्र-मन्त्र को केवल शब्दों का समूह समझना उनके प्रभाव को कम करके आंकना है। मन्त्र तो शक्तिशाली लयबद्ध शब्दों की तरंगे हैं जो बहुत ही चमत्कारिक रूप से कार्य करती हैं। ये तरंगे भटकते हुए मन को केंद्र बिंदु में रखती हैं।  शब्दों का संयोजन भी साधारण नहीं होता है, इन्हे ऋषि मुनियों के द्वारा वर्षों की साधना के बाद लिखा गया है। 

मन्त्रों के जाप से आस पास का वातावरण शांत और भक्तिमय हो जाता है जो सकारात्मक ऊर्जा को एकत्रिक करके मन को शांत करता है। मन के शांत होते ही आधी से ज्यादा समस्याएं स्वतः ही शांत हो जाती हैं। मंत्र किसी देवी और देवता का ख़ास मन्त्र होता है जिसे एक छंद में रखा जाता है। 


वैदिक ऋचाओं को भी मन्त्र कहा जाता है। इसे नित्य जाप करने से वो चैतन्य हो जाता है। मंत्र का लगातार जाप किया जाना चाहिए। सुसुप्त शक्तियों को जगाने वाली शक्ति को मंत्र कहते हैं। मंत्र एक विशेष लय में होती है जिसे गुरु के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। जो हमारे मन में समाहित हो जाए वो मंत्र है। ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के साथ ही ओमकार की उत्पत्ति हुयी है। 

इनकी महिमा का वर्णन श्री शिव ने किया है और इनमे ही सारे नाद छुपे हुए हैं। मन्त्र अपने इष्ट को याद करना और उनके प्रति समर्पण दिखाना है। मंत्र और स्त्रोत में अंतर है की स्त्रोत को गाया जाता है जबकि मन्त्र को एक पूर्व निश्चित लय में जपा जाता है।



’बीज मंत्र क्या होता है 

देवी देवताओं के मूल मंत्र को बीज मन्त्र कहते हैं। सभी देवी देवताओं के बीज मन्त्र हैं। समस्त वैदिक मन्त्रों का सार बीज मन्त्रों को माना गया है। हिन्दू धर्म के अनुसार सबसे प्रधान बीज मन्त्र ऊँ को माना गया है।  ऊँ को अन्य मन्त्रों के साथ प्रयोग किया जाता है क्यों की यह अन्य मन्त्रों को उत्प्रेरित कर देता है। बीज मंत्रो से देव जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर शीघ्र दया करते हैं। जीवन में कैसी भी परेशानी हो यथा आर्थिक, सामजिक या सेहत से जुडी हुयी कोई समस्या ही क्यों ना हो बीज मन्त्रों के जाप से सभी संकट दूर होते हैं।


’स्तोत्र और मंत्र जाप के लाभ: 

 चाहे मन्त्र हो या फिर स्त्रोत इनके जाप से देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में मन्त्रों की महिमा का विस्तार से वर्णन है। सृष्टि में ऐसा कुछ भी नहीं है जो मन्त्रों से प्राप्त ना किया जा सके, आवश्यक है साधक के द्वारा सही जाप विधि और कल्याण की भावना। बीज मंत्रों के जाप से विशेष फायदे होते हैं। यदि किसी मंत्र के बीज मंत्र का जाप किया जाय तो इसका प्रभाव और अत्यधिक बढ़ जाता है। 


जबलपुर कथा का दूसरा दिन: गुरूदेव ने बताया जीवन में खुशहाली लाने के उपाय

जबलपुर: परम पूज्य सतीश सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा पावन नवरात्रि पर शिवमहापुराण कथा के द्वारा भक्ति की अविरल जलधारा बहा रहे हैं। कथा के दूसर...