सद्गुरूनाथ जी महाराज की कथा सुनने वाले श्रद्धालुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. सद्गुरूनाथ जी महाराज सिर्फ शिवमहापुराण की कथाएं ही नहीं सुनाते, बल्कि जीवन की कठिनाइयों को सरल करने के उपाय भी बताते हैं. सद्गुरूनाथ जी महाराज ने डिप्रेशन को लेकर स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितयों में शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय या घर कहीं भी मनुष्य तनाव या डिप्रेशन में है. दबाव हर जगह है. उस प्रेशर से दूर रहना सीखना चाहिए. अगर स्कूल में हैं तो पढ़ाई तो करनी ही पड़ेगी, तो सबसे अच्छा उपाय है खुश होकर पढ़ें।
सद्गुरूनाथ जी महाराज बताते हैं कि शिव के गले में विष होने पर भी भगवान भोलेनाथ अलमस्त होकर साधना में रहते हैं. इसलिए हृदय से प्रसन्न रहेंगे तो आनंद की प्राप्ति होगी. मन को छोटा करके नहीं बैठना चाहिए.
उन्होंने आगे बताया कि भगवान भोलेनाथ का रूप यह संदेश देता है कि जीवन का विष पीना है, लेकिन उसे कंठ में रखिए शरीर में नहीं उतारना है. उन्होंने कहा कि संसार में किसी को भी मृत्यु की तारीख या समय नहीं मालूम होती है. यदि आप परमात्मा से कहें कि संसार में मेरे आने की सूचना 9 महीने पहले दे देते हैं, तो जाने की सूचना 9 मिनट पहले दे दे. मगर ऐसा संभव नहीं होता है इसलिए खुश होकर जिएं.।
विचारों से ही भाग्य बनते और बिगड़ते हैं, इसलिए कहा गया है कि एक विचार किसी का भी भाग्य परिवर्तित कर सकता है। बिना उचित विचार शक्ति के जीवन शून्य है। हम मानव हैं, हमारा मन है, हमारे पास बुद्धि है इसलिए विचार भी है, सही विचार सफलता और गलत विचार असफलता दिलाता है। विचार शक्ति को जागृत कर हम अपने जीवन में उचित परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

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