Monday, October 2, 2023

श्राद्ध पक्ष विशेष: गुरूदेव ने लोगों की जिज्ञासा को ऐसे किया शांत

वैदिक संस्कृति में आत्मा को अजन्मा नित्य और शाश्वत माना जाता है  मृत्यु के बाद इस शरीर का नाश होता है परन्तु आत्मा का नहीं। यह विभिन्न योनियों में अपने कर्मों के अनुसार जन्मता हुआ दुःख और सुख भोगता रहता है। व्यक्ति अपने पिछले जन्म में जो कर्म करता है उसे अगले जन्म में उसी प्रकार की योनि में जन्म लेना पड़ता है। यही शाश्वत नियम है यही सनातन विज्ञान है। हमारे विभिन्न धर्म ग्रंथों में बार.बार इस बात का उल्लेख हुआ है परन्तु यह भी एक आश्चर्य है कि मनुष्य सब कुछ जानते हुए भी बुरे कर्मों को नहीं छोड़ता है। कोई भी व्यक्ति पिछले जन्मों में किस प्रकार के कार्य करता है। यह उस व्यक्ति की जन्मकुंडली बता देती है और पिछले जन्मों के पापों को उस कुंडली में विभिन्न दोषों से जाना जाता है उन दोषों में प्रमुख है.पितृ दोष।

जिस जातक की कुंडली में पितृ.दोष होता है उस जातक को विभिन्न प्रकार के कष्ट उठाने पड़ते हैं ऐसा जातक बहुत ही विषयम परिस्थितियों में जीने को विवश होता है। इस प्रकार के जातक का मन अशांत गुप्त चिंता से पीड़ित विवाह.सम्बंधी परेशानियांए स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानियां अपयश कार्यों में विघ्न और अनेकों प्रकार की बाधाएँ ऐसे जातक के जीवन में आती रहती है। इसलिए जिस जातक के भी कुंडली में इस प्रकार के दोष हो उसे दोष का निवारण अवश्य करा लेना चाहिए।

किसी भी जातक की जन्मकुंडली में जब सूर्य और राहू या सूर्य और शनि ग्रह प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम या दषम भाव में यह योग घटित हो तो जातक को पितृ दोष होता है। यह रोग जातक की कुंडली में जिस भाव में होता है उस जातक के तदनुसार ही उसके फल मिलते हैं।


. यदि जातक की कुडली में यह योग प्रथम भाव में घटित होता है तो जातक को स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानियां विवाह सुख में कमी बनी रहती है।

. यदि जातक के दूसरे भाव में यह योग घटी होता है तो जातक के परिवार में क्लेश, धन की कमी और आर्थिक रूप से ऐसा जातक सदैव उलझनों से ग्रसित रहता है।

. यदि जातक की कुंडली के चतुर्थ भाव में पितृ दोष विद्यमान हो तो माता.पिता के सुख में कमीए मकान सम्बंधी परेशानियांए घर की स्त्रियों को स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानियां सदैव बनी रहती है।

.यदि पितृदोष किसी भी जातक की कुंडली में पांचवे भाव में घटित हो रहा हो तो ऐसे जातक की विद्या में विघ्न, संतान के सुख में कमी, आर्थिक क्षेत्र में असफलताएं,  धन की कमी जातक को परेशान करती है।



.यदि किसी जातक को यह योग सप्तम भाव में घटित हो रहा हो तो ऐसे जातक के विवाह में बाधा और यदि विवाह हो भी जाए तो वैवाहिक सुख में कमी रहती है ऐसे जातक को व्यापार में अनेको बार परेशानियों का सामना करता पड़ता है।

. यदि पितृ दोष नवम भाव में हो तो भाग्य में कमी लाता है उस जातक के बनते.बनते काम बिगड़ जाते हैं और उस को आर्थिक क्षेत्र में असफलताओं का सामना करता पड़ता हैं।

.यदि किसी जातक के पितृ दोष दशम भाव में घटित हो तो ऐसे जातक को सरकारी नौकरी नहीं मिलती उसे हर कार्य में असफलता ही देखने को मिलती है।

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