Sunday, August 27, 2023

भारत विश्व गुरू बने और विश्व का मार्गदर्शन करे : सद्गुरूनाथ जी महाराज

कथा के सातवें दिन सद्गुरूनाथ जी महाराज ने शिव भक्तों से कहा कि शिव नाम जपने से आपके जीवन की सारी बुराईयां खत्म हो जाएगी। आत्मा शुद्ध हो जाएगा। इतने भव्य पैमाने पर कथा करवाने के लिए गुरूदेव ने सभी आयोजकों को धन्यवाद किया और कहा कि आप लोगों के अथक प्रयास से कार्यक्रम इतना सफल और सुसज्जित ढंग से संपन्न हो गया। 


पत्रकारों के साथ बातचीत में सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि भारत देश में जिस प्रकार सनातन धर्म का उत्थान हो रहा है इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं कि भारत पुनः विश्व गुरू बनेगा।  अलजेबरा, स्कवायर रूट, समय के सिद्धांत, आर्किटेक्चर, मेटालर्जी यहां तक की अंतरिक्ष विज्ञान के सिद्धांत भी वेदों से मिले हैं। वेदों में बहुत सी ऐसी बातें लिखी गई है। जो आज विश्व भी मान रहा है। मंडल ग्रह लाल है, चंद्रमा के दक्षिण धु्रव पर 15 दिन रात्रि और 15 दिन उजाला रहता है। ये धर्मग्रंथों में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के सिद्धांत पर आधारित है। 

चंद्रमा के बारे में अनेक ऐसी बातें है जो वेदों में पहले ही बताई जा चुकी है। अगर इस पर रिसर्च हो तो सारे रहस्य अपने आप खुलते चले जाएंगे। जो लोग कंम्प्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सीखना चाहते हैं उनके लिए संस्कृत भाषा काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। 

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, भौतिक विज्ञान आदि संस्कृत भाषा में लिखे गए थे लेकिन अभी तक इस पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है। एक किताब है सूर्य सिद्धांत, यह किताब आठवी शताब्दी की है। मैं आश्चर्यचकित हुआ किस उस किताब में सौर उर्जा और टाईम टेबल के बारे में बताया गया है। 

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा का विशेष स्थान है। चंद्रमा मन, वस्तु, सुख धन, संपदा, माता आदि का कारण ग्रह है। जहां तक दिशा की बात है तो यह उत्तर-पश्चिम दिशा के स्वामी है। चंद्रमा सभी ग्रहों में सबसे छोटा है। लेकिन गति में सबसे तेज, चंद्रमा किसी भी राशि में ढ़ाई दिन तक रहता है। फिर यह दूसरे चिन्ह में घूमता रहता है।

चंद्रमा पर जहां चंद्रयान लैंड हुआ है उस जगह का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिव-शक्ति रखा है यह बड़े ही सौभाग्य की बात है। देवाधिदेव महादेव जिन्होंने पूरे विश्व का निर्माण किया है। जिन्होंने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारणा किया हुआ है। उस चंद्रमा की धरती को शिव-शक्ति नाम देने से देव चंद्रमा भी अपने आप को प्रफुल्लित महसूस कर रहे होंगे। विज्ञान के क्षेत्र में ये भारत की बड़ी उपलब्धि है। देश एवं समाज ऐसे ही उन्नति करता रहे जिससे भारत पुनः विश्व गुरू बने और समूचे विश्व का मार्गदर्शन कर सके।

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