जयपुर। जयपुर के श्री गोंिवद जी मंदिर में आयोजित श्रावणी शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भी काफी संख्या में शिवभक्त ने आकर सद्गुरूनाथ जी महाराज के मुखारविन्द से श्रावण के पवित्र मास में शिवमहापुराण का श्रवण किया। गुरूदेव ने शिवमहापुराण कथा के ऐसे-ऐसे प्रसंग सुनाए जिसको सुनकर भक्त खुशी से नाचने लगे। चारों तरफ कथा स्थल का माहौल शिवमय नजर आ रहा था। पूरी कथा के दौरान सारे लोगों ने एकाग्रचित होकर कथा को सुना। कथा का श्रवण करने के लिए कैबिनेट मंत्राी महेश जोशी जी ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिवमहापुराण कथा सुनने का एक अलग ही धार्मिक महत्व है।
शिवमहापुराण कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने श्रावणी शिव महापुराण की विशेषतता का धार्मिक रूप से विवेचन किया उन्होंने कहा कि श्रावणी शिव महापुराण का मतलब प्रकृति का वास्तविक दर्शन है। श्रावण संपन्नता का नाम है। श्रावण खुशहाली का नाम है। इस समय प्रकृति में चारों तरफ एक विशेष दिव्यता का दिखाई देती है। मानो भगवान शिव के आगमन के लिए प्रकृति भी सुंदर हो गई।
सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि पूरी पृथ्वी गोल नहीं है बल्कि ये शिवलिंग के आकार की है। आकाश कटोरे जैसा है मानों कटोरे के अंदर शिवलिंग रखा है और उस पर जलाभिषेक बारिश के रूप में उस पर होता रहता है और पूरी पृथ्वी पुष्पित और प्लवित होती है। श्रावण मास में जो जिस कामना से पूजा, पाठ, यज्ञ इत्यादि करता है उसको उसी तरह फल देने श्रावण मास में महादेव आते हैं।
गुरू के महत्व को बताते हुए सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि जिन व्यक्तियों के जीवन में गुरू ने प्रवेश नहीं किया उनके जीवन में अधूरापन रहता है। गुरू पृथ्वी पर साक्षात शंकर के स्वरूप में है। अगर आपके जीवन में गुरू नहीं है तो आपको कन्यादान का फल नहीं मिलता। शिव महापुराण के अनुसार गुरू के बिना तप का जाप का पूजा पाठ का पूर्ण फल नहीं मिलता है। गुरू ही आपके जीवन में सही मार्गदर्शन करते हैं। जब तुम्हारे जीवन में गुरूभक्ति का बल होता है तो सब कुछ परमात्मा खुद ही देने लगते हैं। आपको कोई चीज मांगने की जरूरत नहीं रहती। ईश्वर स्वयं आपका सहायक हो जाता है।
जिसके घर में बरकत नहीं हो रही है हो अपनी जिंदगी में धार्मिकता एवं ईमानदारी पूर्वक अपने जीवन के सारे काम करें। प्रभु का सिमरन करें। जैसा निर्माण आप अपने व्यक्तित्व का करेंगे उसी तरह के फल मिलेंगे। प्रभु सब देखते रहते हैं कि जिंदगी में तुमने अपना काम ईमानदारीपूर्वक किया कि नहीं। प्रभु ने जो काम आपके निर्मित भेजा है उसी में पूरी पारदर्शिता के साथ करो। तभी जिंदगी में बरकत आनी शुरू होगी।



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