Wednesday, August 9, 2023

कभी भी पूजा-पाठ करने का दिखावा न करें प्रभु सब जानते हैं: सद्गुरूनाथ जी महाराज

सद्गुरूनाथ जी महाराज के चमत्कारिक होने और उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा उनके भक्तों को देखकर ही लगाया जा सकता है देश-विदेश में और कई जानी-मानी हस्तियां उनकी भक्त हैं जो उनमें गहरी श्रद्धा रखते हैं। 

सद्गुरूनाथ जी महाराज का कहना है कि मनुष्य अपनी चिंताओं को सबको बताता है और उसी चिंता में उलझा रहता है लेकिन उसे समाधान नहीं मिलता। अपनी समस्याओं को दूसरों को बताने के बजाय ईश्वर को बताना चाहिए और ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए। दूसरों के सामने अपनी परेशानियां बताने से लोगों के सामने उसका मजाक बनता है।

यह जीवन तो व्यतीत होना ही है !  सब कुछ आपके हाथ में है ! आप कैसा जीवन जीना चाहते हैं ? घटिया, रोते , चीखते हुए दुःख में अपने जीवन को बरबाद करते हुए या स्वयं को उत्कृष्टता प्राप्त कराते हुए  जीवन में प्रत्येक पल का आनन्द प्राप्त करते हुए मुस्कराहट के साथ में चिन्तन के साथ कार्यों में डूबते हुए और अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर बढ़ते हुए ! कैसा जीवन आप व्यतीत करना चाहते हैं ? वह आपके हाथ में है और यही आपके भाग्य का निर्माण करने वाला तथ्य होता है , इसलिए मैं प्रत्येक क्षण आपका जीवन रचनात्मक बनाने की ओर अग्रसर रहता हूँ ! 


आपका भाग्य, दुर्भाग्य, आयु पूर्णायु, अमरत्व और मृत्यु, पूर्णता और अपूर्णता सब कुछ आपके हाथ में ही तो है , मगर उसकी नींव साधना है, निरंतर साधना !  जो साधना में लगातार एकाग्र भाव से साधना में रत है ! निरंतर क्रियाशील है ! जिसमे स्वयं के आत्मविश्लेषण का भाव है, जो बाधाओं से भयभीत नहीं है ! विपरीत परिस्थितियों में भी जो साधना में लगा रहता है ! जो अपनी दरिद्रता को समाप्त करना चाहता है । जो धन का , सुख का वरण करना चाहता है,  जो अपने जीवन के रहस्यों को जानना चाहता है।  जो अपने गृहस्थ धर्म को सच्चाई से निभा रहा है , जो अपनी विषमताओं को समाप्त करना चाहता है ! जिसके ह्रदय में साधना में पूरी आस्था है वह साधक किसी भी जाति , धर्म अथवा वेश का हो वह ही सच्चा साधक है ! एक बार मेरे पास एक परेशान व्यक्ति आया ! उसने अपनी व्यथा बड़े ही करुण शब्दों में सुनाई ! मैंने उसे शिव मन्त्र का जाप और शिवलिंग पर जल चढ़ाने का परामर्श दिया ! 


बस अगले ही दिन वह अपने मित्र को कैमरा साथ लेकर पंहुच गया ! मन्त्र जाप करते हुए, जलार्चन करते हुए अनेक दिशाओं से चित्र खिंचवाए ! यह पूजा नहीं वरन पूजा का दिखावा है ! मन्त्र जाप का प्रदर्शन है ! जब इस बात को हम समझते हैं तो क्या भगवान भोले नाथ इतने भोले हैं जो इस मन्त्र जाप के आडम्बर को नहीं समझते ? ऐसे पाखण्डी साधक की मनोकामना तो भला क्या पूरी होगी ? सज़ा मिलेगी ! अब जो भगवान को धोखा देते हैं , वह इन्सान को क्या छोड़ेंगे ? 



साधना मार्ग में सफ़लता प्राप्ति के समय साधक असावधान हो सकता है ! उस समय गुरु उसे संभालते हैं ! एक बीज को पौधा बनने में समय लगता है ! जिसकी हम सभी को प्रतीक्षा करनी चाहिए ! यही बात ‘सिद्धि’ की है ! हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए ! वास्तव में आज का कलियुगी साधक ‘राम नाम का आलसी , भोजन को होशियार’ ! हर समय येन केन प्राकारेण धन कमाने की चेष्टा करेंगे ! साधना से बचने का प्रयत्न करेंगे ! शिकायत यह करेंगे हमें साधना में सफ़लता नहीं मिली , उपाय किया पर कार्य नहीं बना । 

स्मरण रखें तीर वही आसमान पर चड़ता है जो कमान से निकल जाता है ! मैं बार बार सोचता हूँ कि यह कैसे लोग हैं ?  कभी साधना के उद्देश्य से हिमालय जाओ तो साधना का खजाना लाना ना भूलना ! हिमालय के रंग बिरंगे फूलों की बात जानकार आश्चर्य चकित रह जाओगे ! तुमने ‘फूलों की घाटी’ के विषय में तो अवश्य ही सुना ही होगा ? यह विश्व के प्रसिद्ध फूलों की घाटी हिमालय क्षेत्र में है ।

विवाह जैसी पवित्र बेला की प्रतीक्षा में कन्या को अपमान, कुण्ठा , घ्रणा , क्रोध और आत्मघात जैसे कितने ही दंश सहने पड़ते हैं ! इसका वर्णन में यहाँ नहीं करना चाहता हूँ क्योंकि यह एक मर्मस्पर्शी विषय है ! मैंने स्वयं देखा है विवाह से पूर्व हर कन्या दाम्पत्य जीवन के सुन्दर स्वप्न संजोती है और बड़ी ही उत्कंठा से अपने जीवन साथी का मार्ग निहारती है । किन्तु जब उपयुक्त जीवन साथी नहीं मिलता तो विवश होकर भाग्य को दोष देने लगती है ! 


अनुकूल वर प्राप्ति में ‘मंगलागौरी व्रत , कथा एवं हवन’ एक सशक्त उपाय है ! अशुभ ग्रहों से पीड़ित एवं आर्थिक कारणों से पीड़ित कन्या को शिव पार्वती का विधिपूर्वक अर्चन करना चाहिए ! इसके बाद केले के पेड़ पर मौली 11 बार लपेट कर निम्न मन्त्र का जप करें ! जप पूर्ण होने पर केले के पोधे की परिक्रमा करें ! इसका शीघ्र सुखद फल प्राप्त होता है ! मन्त्र = ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्त्रकिरणाये ! मनोवांछित देहि देहि स्वाहा ! इस मन्त्र से आप हवन भी कर सकते हैं !शेष फिर ! ऊँ नमः शिवाय।

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