वेदों का आदेश है ‘’स्वर्ग कामो यज्ञ यजेत’’ अर्थात अगर जीवन में सुख, दीर्घायु और स्वर्ग प्राप्त करना है, मोक्ष प्राप्त करना है तो यज्ञ करें ! वेद की यह घोषणा एकदम सत्य और सारगर्भित है ! यज्ञ करने से स्वर्ग की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही मनोकामनाएँ भी पूर्ण होती है ! इसके लिए यज्ञकर्ता और यज्ञ कराने वाले दोनों के ही कुछ नियम और कर्तव्य हैं। हवनकर्ता शुद्ध ह्रदय से शास्त्रों द्वारा बतलाये गए संकल्प से और सटीक मन्त्रों से हवन संपन्न करे ! हवन कराने वाला भी शुद्ध ह्रदय से अग्नि देवता में विश्वास करते हुए तथा आचार्य के दिशा निर्देशों का पालन करे !
साधना अथवा उपाय में असफ़लता का मुख्य कारण ‘दुविधा’ है ! हम कोई साधना या उपाय करते हैं तो सोचते हैं अगर हम वह उपाय या साधना करते तो सफ़ल होने के अधिक अवसर मिलते ? आप कुछ भी विधिपूर्वक अथवा निष्ठा के साथ नहीं कर पाते हैं ! जिसकी परिणिती यह होती है कि हम असफ़ल होकर संशय से भर जाते हो।‘विश्वास और निष्ठा’ आध्यात्मिक जगत में सफलता की कुंजी है ! जीवन में अगर सफल होना चाहते हो तोे पहले सुनना सीखो। इसके पश्चात साधना या उपाय में सिद्धहस्त बनने का प्रयत्न करो !
मन्दाकिनी शिव का रूप है ! अलकनंदा विष्णु का रूप है ! दोनों का मिलन ‘सिद्धि’ प्रदायक है ! बस हमें सिद्धि का दीवाना बनना है ! परिवार तब भी था जब तुम नहीं थे ! परिवार आज भी है जब तुम हो , परिवार तब भी रहेगा जब तुम नहीं रहोगे ! साधना आज भी है कल भी थी और भविष्य में भी रहेगी।


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