Thursday, August 10, 2023

सच्चा 'गुरु' कौन, आखिर जीवन में क्यों है गुरु की जरूरत?

 वेदों का आदेश है ‘’स्वर्ग कामो यज्ञ यजेत’’ अर्थात अगर जीवन में सुख, दीर्घायु और स्वर्ग प्राप्त करना है, मोक्ष प्राप्त करना है तो यज्ञ करें ! वेद की यह घोषणा एकदम सत्य और सारगर्भित है ! यज्ञ करने से स्वर्ग की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही मनोकामनाएँ भी पूर्ण होती है ! इसके लिए यज्ञकर्ता और यज्ञ कराने वाले दोनों के ही कुछ नियम और  कर्तव्य हैं। हवनकर्ता शुद्ध ह्रदय से शास्त्रों द्वारा बतलाये गए संकल्प से और सटीक मन्त्रों से हवन संपन्न करे ! हवन कराने वाला भी शुद्ध ह्रदय से  अग्नि देवता में विश्वास करते हुए तथा आचार्य के दिशा निर्देशों का पालन करे !

साधना अथवा उपाय में असफ़लता का मुख्य कारण ‘दुविधा’ है ! हम कोई साधना या उपाय करते हैं तो सोचते हैं अगर हम वह उपाय या साधना करते तो सफ़ल होने के अधिक अवसर मिलते ?  आप कुछ भी विधिपूर्वक अथवा निष्ठा के साथ नहीं कर पाते हैं ! जिसकी परिणिती  यह होती है कि हम असफ़ल होकर संशय से भर जाते हो।‘विश्वास और निष्ठा’ आध्यात्मिक जगत में सफलता की कुंजी है ! जीवन में अगर सफल होना चाहते हो तोे पहले सुनना सीखो। इसके पश्चात साधना या उपाय में सिद्धहस्त बनने का प्रयत्न करो ! 


प्रवचन तो सभी सुनते हैं , पर जो साधक  उस पर अमल करता है, उसी का सुनना सार्थक है। संस्था के साथ चलना सीखो , किसी दूसरे का साथ मत खोजो। आध्यत्म  का तो लक्ष्य ही यह है कि वह साधक की तन्द्रावस्था को तोड़ सके, उसे नींद से जगा सके और यह ज्ञान करा सके कि अभी तक वह जिसे जीवन समझ रहे थे ? वह वास्तविक जीवन नहीं अपितु एक गहरी नींद थी  तन्द्रा थी  जिसमे वह खोये हुए थे ।  ह्रदय में विश्वास और सच्ची श्रद्धा हो तो अपने गुरू मत्र का एक बार का जाप ही पर्याप्त है ! बस एक बार नाम लेते तो बात बन जाती ! सोचता हूँ अगर शरीर स्वास्थ्य और वातावरण साथ दे तो साधकों को किसी पहाड़ पर ले जाऊं और मन्त्र साधना का ‘अनुभव’ करा दूँ ! वह ‘अनुभव’ जिसकी प्रतीक्षा आपको वर्षों से थी ! वह पर्वत जहाँ दिन में तपती पहाड़ों की पगडंडियाँ, ठण्डी हवा के थपेड़े, ऊपर से गिरते झरने, , उड़ते पक्षी , घास चरते मवेशी  कुछ ऐसा ही विवरण मिलता है पहाड़ों का ।

 मन्दाकिनी शिव का रूप है ! अलकनंदा विष्णु का रूप है ! दोनों का मिलन ‘सिद्धि’ प्रदायक है ! बस हमें सिद्धि का दीवाना बनना है ! परिवार तब भी था जब तुम नहीं थे ! परिवार आज भी है जब तुम हो , परिवार तब भी रहेगा जब तुम नहीं रहोगे ! साधना आज भी है कल भी थी और भविष्य में भी रहेगी।

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