शिव जटाओं में गंगा को धारण किये हुए, गले में सांप लपेटे हुए और देह बाघाम्बर धारण किये हुए, सभी देवताओं से बिलकुल भिन्न हैं. शिव जी ने अपने रूप के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण सन्देश देने का प्रयास किया है. सद्गुरूनाथ जी महाराज ने शिवजी के इन्हीं अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा हटाया और कहा कि भगवान शिव के रहस्य सम्पूर्ण मानवजाति को कुछ न कुछ शिक्षा देते हैं.
शिव जी की जटाएं
महादेव शिव को अंतरिक्ष का देवता कहा गया है. आकाश शिवजी की जटास्वरूप है इसलिए उन्हें व्योमकेश भी कहा जाता है. उनकी जटाएं पवन या वायु प्रवाह का प्रतिनिधित्व करती हैं. महादेव गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए उसे अपनी जटाओं में धारण करते हैं. शिव जी का गंगा को धारण करना यह दर्शाता है कि शिव न केवल संहार के प्रतीक हैं अपितु पृथ्वी लोक में मानवजाति को पवित्रता, ज्ञान और शान्ति का भी सन्देश देते हैं.
मस्तक पर चन्द्रमा
शिव जी के सिर पर विराजित अर्धचंद्र उनके मन को शांत रखते हैं और विषपान के कारण नीले हुए शिव जी के शरीर को शीतलता प्रदान करने के लिए चन्द्रमा उनके मस्तक पर सुशोभित हैं.
महादेव का तीसरा नेत्र
यह तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. साथ ही यह संसार में अज्ञानता को समाप्त करने का भी प्रतीक है. आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाये तो शिव जी का तीसरा नेत्र भौतिक दृष्टि से पूरे संसार की ओर देखने का सन्देश देता है.
कंठ में सर्प
सर्प एक ऐसा जीव है जो पूर्णतया तमोगुण और संहारक प्रवृत्ति से भरपूर है. यदि सर्प किसी मनुष्य को काट ले तो मनुष्य का अंत हो जाता है. ऐसे भयानक जीव को शिव जी अपने कंठ में धारण किये हुए हैं इसका अर्थ है कि महादेव ने तम अथवा अज्ञान या अन्धकार को अपने नियंत्रण में किया हुआ है.
शिव जी का साथी नंदी
शिव जी का सबसे निकट का साथी नंदी ध्यान का प्रतीक है, जीवन के प्रति सजगता का प्रतीक है और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को पाने के प्रति सक्रियता का प्रतीक है. नंदी का वास्तविक स्वभाव है ध्यान में मग्न रहना. उसमे किसी भी प्रकार की अपेक्षा या मोह या आसक्ति नहीं है. नंदी की प्रवृत्ति शांत है और वो सन्देश देता है कि प्रत्येक मनुष्य को किसी भी प्रकार की आसक्ति को त्यागकर, ध्यान में लीं रहना चाहिए और ईश्वर से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए.
कंठ में मुंडमालाशिव जी के कंठ में मुण्डियों की माला का भी गहन अर्थ है. यह माला मृत्यु का प्रतीक है और इस बात का बोध कराती है कि प्रत्येक जन्म लेने वाला मृत्यु को अवश्य प्राप्त होता है. प्रलय के पश्चात सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश हो जाता है, यह बोध होने से मनुष्य को अपनी वास्तविकता का बोध होता है जिससे क्षण भर के लिए ही सही परन्तु मन में वैराग्य का भाव उत्पन्न हो ही जाता है.
शरीर पर भस्म
शिव से जुडी प्रत्येक बात सम्पूर्ण मानवजाति के लिए एक ज्ञान या सन्देश है जैसे उनके शरीर पर भस्म. इसका अर्थ है कि मनुष्य की देह का जब अंत हो जाता है तो अंत में केवल भस्म ही रह जाती है और शरीर संसार से अदृश्य हो जाता है. वेदों में भी यही बताया गया है कि रूद्र अग्नि का प्रतीक है और अग्नि का कार्य है सब कुछ भस्म करना.

Pranam pitashree🙇♀️🙇♀️🌹🌹...Ye aisa darbaar hai jo khi possible ni hai, yha sb possible hai...
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