Tuesday, September 19, 2023

गुरु दीक्षा लेने के बाद जीवन में किस तरह के बदलाव आते हैं?

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने गुरू दीक्षा मानव जीवन के लिए क्यों इतना जरूरी है इस विषय पर प्रकाश डाला और कहा कि आध्यात्मिक गुरु के मार्गदर्शन के बिना आत्मा को जानना या मुक्ति को पाना कदापि संभव नहीं है। इसलिए संतवाणियों और धर्मशास्त्रों में सच्चे गुरु की खोज करने के लिए प्रेरित किया गया है।

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने लोगों को समझाया कि मोक्ष या मुक्ति की प्राप्ति कैसे हो? इसके लिए एक ही आधार है आत्मज्ञान यानि अपनी आत्मा के स्वरूप को अनुभव से जान लेना। आत्मा, परमात्मा और मोक्ष संबंधी जो विद्या है उसे आध्यात्मिक विद्या कहते हैं। अध्यात्म =अधि $ आत्मा अर्थात आत्मा संबंधी। सांसारिक विद्याओं को सीखने के लिए हमें सांसारिक गुरु की आवश्यकता पड़ती है। ठीक उसी तरह यदि हम अपने अंदर के आध्यात्मिक पथ के बारे में जानना चाहें, आध्यात्मिक विद्या को जानना चाहे तो उसे जिस व्यक्ति से जानेंगे वे ही हमारे आध्यात्मिक गुरु होंगे।

1. प्रश्न गुरु दीक्षा क्या है?

सद्गुरूनाथ जी महाराज -गुरु दीक्षा में गुरु अपने शिष्य के अंदर बीज रूपी मंत्र को स्थापित करते हैं, जब शिष्य इस बीज मंत्र का जप करता है तो वह इस बीज को पुष्ट करता है। यह प्रक्रिया वैसे ही है जैसे हम बीज लाकर उसे धरती में बोते हैं फिर उसका खाद, पानी, धूप, हवा आदि के द्वारा सिंचन करते हैं फिर धीरे धीरे बीज अंकुरित होता है और समय के साथ वृक्ष बनता है। जब हम गुरु मंत्र का निरंतर गुरु मार्गदर्शन में जप करते हैं तो एक समय बाद वह मंत्र सिद्ध होता है तथा हमें सिद्धि रूपी फल प्राप्त होता है। गुरु मंत्र ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल तथा सुगम माध्यम है।


2. प्रश्न: मंत्र गुरु से ही क्यों लें, स्वयं ले कर उसका जप क्यों न करें?

सद्गुरूनाथ जी महाराज: जिस प्रकार बाज़ार में माता-पिता अपने बालक के लिये श्रेष्ठ वस्तु का चयन करते हैं उसी प्रकार गुरु भी अपने शिष्य के लिये उपयुक्त मंत्र का चयन कर प्रदान करते हैं। बहुत से ऐसे मंत्र हैं जो कीलित हैं, गुरु जब मंत्र प्रदान करते हैं तो वह उत्कीलन करके ही प्रदान करते हैं जिससे शिष्य पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकता है।

स्वयं मंत्र का चयन करने के बहुत हानि हैं जैसे अवांछित शक्तियों का जाग्रत हो जाती हैं, कीलित मंत्र का जप व्यर्थ है, जब कर्म कटने प्रारम्भ होंगे तो जो कष्ट आयेंगे उनसे रक्षा करने वाला कोई न होगा, सभी मन्त्रों का 1 निश्चित क्रम होता है उसे न जानने पर वह मंत्र हानि भी पहुंचा सकता है।

प्रश्न 3. गुरु दीक्षा लेने के बाद जीवन में किस तरह के बदलाव आते हैं?

सद्गुरूनाथ जी महाराज: आपका मनुष्य जीवन बिना गुरू के परिपूर्ण ही नहीं हो सकता, गुरू-दीक्षा लेने के बाद आपके अंदर की शक्तियां और कुंडली जागृत हो जाता है जिससे आपके सारे काम स्वतः ही बनने लगते है। बस जरूरत है आपको गुरू के प्रति पूर्ण श्रद्धा और समर्पण रखने की। भगवान के बाद गुरू ही आपके सच्चे हितैषी इस दुनिया में है।


अगर आप गुरु के बताये मार्ग का अनुसरण करते हैं तो विश्वास मानिये आपके जीवन मे बहुत से सुखद बदलाव आपको देखने को मिल सकते हैं जैसे मानसिक शांति, अपार धन संपदा (अगर आप चाहते हैं), मान सम्मान, यश, वैभव तथा जीवन ऐसा हो जायेगा जैसे आपने अपनी जीवन नैया गुरुदेव के हाथ सौंप दी है और गुरु भगवान उस नौका को स्वयं भवसागर से पार लगा रहे हैं परंतु ऐसा तब होगा जब आपको साधना करते हुए कम से कम 2दृ3 वर्ष बीत जाएंगे तथा आप अपने गुरुमंत्र को जाग्रत कर लेंगे। गुरु सिर्फ हमको मार्ग दिखा सकते हैं उस मार्ग पर चलना हमारा ही काम है, यह मार्ग बहुत कठिन है जिसपर हमें चलना है, गुरु सिर्फ हमें कठनाई को पार करने का तरीका बतायेंगे, कठिनाई हमें स्वयं पर करनी है।

सनातन वैदिक धर्म में दृढ़ मान्यता है कि आत्मा अजर, अमर, अविनाशी है। जब एक शरीर का अंत होता है तो आत्मा किसी दूसरे शरीर में प्रवेशकर नया जन्म धारण करती है। यह पुनर्जन्म का चक्र या आवागमन का चक्र तब तक चलता रहता है जब तक मानव साधना द्वारा अपने को मोक्ष या मुक्ति की स्थिति में नहीं पहुंचा लेता।




No comments:

Post a Comment

जबलपुर कथा का दूसरा दिन: गुरूदेव ने बताया जीवन में खुशहाली लाने के उपाय

जबलपुर: परम पूज्य सतीश सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा पावन नवरात्रि पर शिवमहापुराण कथा के द्वारा भक्ति की अविरल जलधारा बहा रहे हैं। कथा के दूसर...