मृत्यु शाश्वत सत्य है तो क्यों ना हम इसे स्वीकार कर लें और जितना जीवन हमें मिला है उसको शांति और सौहार्द के तरीके से जिएं। सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि भौतिक युग में चकाचौंध हमारे जीवन पर प्रभाव डाल रही है। हम नेक कार्यों से दूर होकर अनेक उलझे हुए कार्यों से जुड़ते जा रहे हैं। हमें जीवन को भूल जाना है, उलझाना नहीं है। धर्म की राह को जानें। धर्म की राह को समझें, जीवन आसान हो जाएगा।
जो प्रायः यह कहते है कि बहुत बिजी हूँ, वह थोड़े लापरवाह आदमी है ! काम आवश्यक है तो हर आदमी के पास समय है ! मैंने बहुत से ऐसे लोग देखे हैं, जो जितना भी मिल जाए कम समझते हैं। कुछ और की खोज में अन्य लोगों को टटोलते रहते हैं। अरे भाई , जिसका अपनी माँ के दूध से संतुष्टि नहीं मिली, वह दुनिया भर की गौओं का दूध पीले असंतुष्ट का असंतुष्ट ही रहेगा। वह यह नहीं समझते, जब आये संतोष धन सब धन धूरी समान।
सद्गुरूनाथ जी महाराज ने अपने शिष्यों को एकान्त सुख के अनेक सूत्र बतलाए। हर बार लोग बोलते हैं बस इतने ही उपाय हैं या और भी कोई है ? मन बहुत चंचल है यह कभी भी संतुष्ट नहीं होता है। जब व्यक्ति एकान्त में रहता है तो ना कलह होता है , ना लडाई झगडा होता है और ना किसी प्रकार की तू तू मैं मैं होती है ! कुछ भी नहीं होता है। अकेला आखिर लडेगा किस से ? साधना की द्रष्टि से भी विचार करें तो एकांतवास बहुत सुन्दर है , क्योंकि व्यक्ति जब किसी के मध्य में होता है तो साधना के बाधक तत्व आते रहते हैं।
गुरु के पास बैठो, आँसू आ जाएँ, बस इतना ही काफी है। चरण छूने की दौड़ नही बस बैठो भर गुरु के पास, याद रहे भविष्य की कोई आकांक्षा ना हो। मौन प्रार्थना जल्दी पहुँचती हैं गुरु तक क्योंकि मुक्त होतीं हैं शब्दों के बोझ से। गुरु का होना आशीर्वाद है, मांगना नहीं पड़ता, गुरु के पास होने से ही सब मिल जाता है। जैसे फूल के पास जाओ खुशबू सूर्य के पास गर्माहट व रौशनी। मांगना मत गुरु के पास सिर्फ जाना उसकी शरण में, सब स्वयं ही मिल जायेगा।

प्रणाम पिता श्री 🙏🙏🙏🙏🙏 मेरे पिता श्री के कोमल चरणों में कोटि कोटि नमन 🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹........ सर्वप्रथम धन्यवाद पिता श्री आपको कि मेरी जिंदगी में आप गुरु के रूप में आये!
ReplyDeleteतेरी शरण🙇♀️में आकर, मैं🙋धन्य हो गई्!!
मुझे कुछ बोलने की जरूरत नहीं पड़ती है मेरे पिता श्री सब कुछ स्वयं ही दे देते !